Sunday, June 13, 2021
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MahaBharat Story: खूबसूरत राजकुमारी बन गई थी लड़का, एक रात के लिए उधार मिला था पुरुषत्व

आपने महाभारत (Mahabharat) देखी होगी तो आपको शिखंडी नामक किरदार के बारे में भी जानकारी होगी। अगर आप नहीं जानते तो आपको बता दें कि शिखंडी (Shikhandi) महाभारत का एक पात्र है।

महाभारत कथा के अनुसार, शिखंडी काशीराज की ज्येष्ठ पुत्री अम्बा (Amba) का ही दूसरा अवतार था। प्रतिशोध की भावना से उसने भगवान शंकर की घोर तपस्या की और उनसे वरदान पाकर पंचाल के राजा द्रुपद के यहां जन्म लिया। महाभारत के युद्ध में शिखंडी ने अपने पिता द्रुपद और भाई धृष्टद्युम्न के साथ पाण्डवों की ओर से युद्ध किया।

शिखंडी के पूर्व जन्म की कथा

अम्बा का पुनर्जन्म हुआ शिखंडी के रुप में। अम्बा की दो और बहनें थी जिनका नाम अम्बिका और अम्बालिका था।। जब तीनों पुत्रियां विवाह योग्य हुई तो उन्होंने तीनों ही पुत्रियों के लिए स्वयंवर रचाया, जहां हस्तिनापुर के संरक्षक भीष्म पितामह ( bhishma pitamah) ने अपने भाई विचित्रवीर्य के लिए जो हस्तिनापुर का राजा भी था, काशीराज की तीनों पुत्रियों का स्वयंवर से हरण कर लिया और तीनों को हस्तिनापुर ले गए।

हस्तिनापुर ले जाने के बाद भीष्म को पता चला कि अम्बा किसी और के प्रति आसक्त है तो भीष्म ने अम्बा को उसके प्रेमी के पास पहुंचाने का प्रबंध कर दिया लेकिन अम्बा वहां से तिरस्कृत होकर लौटी, जिसके लिए उन्होंने भीष्म को इसका उत्तरदायित्व दिया और उनसे विवाह करने पर पर जोर दिया। भीष्म पितामह के आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन करने की प्रतिज्ञा से बंधे होने का तर्क दिए जाने पर भी वह अपने निश्चय से बदली नहीं।

शिव के वरदान स्वरुप शिखंडी के रुप में उनका जन्म हुआ। चलिए आपको शिखंडी से जुड़ी जानी-अनजानी बातें बताते हैं।

लड़का नहीं लड़की के रुप में हुआ था जन्म
शिखंडी का जन्म एक लड़की के तौर पर हुआ था लेकिन जन्म के समय एक आकाशवाणी के बाद उसे एक लड़के की तरह पाला गया और उसे युद्धकला का प्रशिक्षण दिया गया।

कालंतर में उसका विवाह किया गया लेकिन शादी की रात शिखंडी की पत्नी को इस बात का पता चल गया कि वह पुरुष नहीं है। उसकी पत्नी ने सत्य का ज्ञान होने पर उसका अपमान किया। आहत शिखंडी ने आत्महत्या का विचार लेकर वह पंचाल से भाग गया।

एक दिन के लिए उधार मिला था पुरुषत्व
शिखंड़ी एक जंगल की ओर भागा, जहां उन्हें एक स्थूणा नाम के यक्ष ने बचाया और अपना लिंग परिवर्तन कर एक रात के लिए अपना पुरुषत्व उसे दे दिया। शिखंडी जब स्थूणा को पुरुषत्व वापिस करने गया। तब यक्षओं के राजा कुबेर ने उसकी ईमानदारी से खुश होकर उसे जीवनभर के लिए स्थूणा का पुरुषत्व दे दिया। इस प्रकार शिखंडी एक पुरुष बनकर पंचाल अपनी पत्नी व बच्चों के साथ सुखी वैवाहिक जीवन बिताया। उसकी मृत्यु के पश्चात उसका पुरुषत्व यक्ष को वापस मिल गया।

प्रतिज्ञान पूर्ति और भीष्म का अंत
कुरुक्षेत्र युद्ध में 10वें दिन शिखंडी भीष्म के सामने आ गया लेकिन भीष्म ने उसके रूप में अंबा को पहचान लिया और अपने हथियार रख दिए और तब अर्जुन ने अम्बा के पीछे से उन पर बाणों की बौछर लगा दी और भीष्म पितामह को बाण शय्या पर लिटा दिया। इस प्रकार अर्जुन द्वारा भीष्म को परास्त किया गया, जिन्हें किसी भी अन्य विधि से परास्त नहीं किया जा सकता था।

कार्तिकेय की दी माला शिखंडी ने पहनी

वहीं कथाओं के अऩुसार, कार्तिकेय ने अम्बा को एक माला दी थी जिसे पहनने वाला भीष्म को मार सकता था और वो माला अम्बा, पंचाल के राजा द्रुपद के महल में फेंक आई थी। दूसरे जन्म में द्रुपद के बेटे शिखंडी ने वह माला पहन ली थी जिससे यह तय हो गया कि शिखंडी के कारण भीष्म की मौत होगी। वहीं अश्वत्थामा ने पांडवों के शिविर में घुसकर शिखंडी को उस समय मार डाला जब वह सो रहा था।

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