30 दिसबंर को लगी थी सद्दाम को फांसी, अंतिम शब्द में बताया कि इन लोगों को करता था नफरत!

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इराक के पूर्व तानाशाह सद्दाम हुसैन को 30 दिसंबर 2006 को फांसी पर चढ़ा दिया गया था। उस पर कई सैकड़ों लोगों की हत्या का आरोप था।

अमरीकी की ख़ुफ़िया एजेंसी सी.आई.ए के इंस्पैक्टर जॉन निकसन के अनुसार, अंतिम दिनों में सद्दाम का रवैया बदल गया था और वह ईरानियों के बारे में अपनी घृणा को छुपा नहीं सके। ईरान का नाम सुनते ही वह व्याकुल हो जाते थे।

क्योंकि सद्दाम का मानना था कि ईरानी भरोसेमंद लोग नहीं है और वह सभी को झूठा समझते हैं। ईरान इस्लाम के नाम पर अरब जगत में अपना वर्चस्व बढ़ाना चाहता है। वे सोचते हैं कि अगर उन्हें अवसर मिलता तो बैतुल मुक़द्दस (यरूश्लम) की आज़ादी के अभियान का नेतृत्व करते। वे समझते हैं कि अरब जगत का नेतृत्व कर सकते हैं।

आपको बता दें कि कि सद्दाम ने इराक पर अपने शासन को मजबूत करने के लिए हजारों और लाखों निर्दोष लोगों को मौत के घाट उतार दिया। फ़ांसी के तख़्ते पर चढ़ने से पहले भी वह इराक़ी जनता को ईरान की ओर से होशियार रहने की सिफ़ारिश करता रहा।

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